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भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा आयोजित 4-सप्ताह की शीतकालीन इंटर्नशिप-2024 संपन्न

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा आयोजित 4-सप्ताह की शीतकालीन इंटर्नशिप-2024 संपन्न

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग: 18 राज्यों और दो केन्द्र-शासित प्रदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के विभिन्न शैक्षणिक विषयों के 61 स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों ने भाग लिया

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति श्री वी. रामसुब्रमण्यन का कहना है कि आज के युवाओं को सूचनाओं तक जबरदस्त पहुंच का सर्वोत्तम और रचनात्मक उपयोग करना चाहिए

उन्होंने युवाओं से जीवन में मानवीय मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया जिसके बिना वे दूसरों के मानवाधिकारों का सम्मान नहीं कर सकते

उन्होंने मानवाधिकारों का सम्मान व पालन करने की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा और संस्कृति की समृद्धि को रेखांकित किया

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के महासचिव श्री भरत लाल ने प्रशिक्षुओं से मानवाधिकारों की पहुंच का विस्तार करने के लिए ज्ञान का उपयोग करने का आग्रह किया

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा आयोजित 4-सप्ताह की शीतकालीन इंटर्नशिप-2024 संपन्न

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए आयोजित 4-सप्ताह की शीतकालीन इंटर्नशिप-2024 आज संपन्न हुई। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विभिन्न शैक्षणिक विषयों की 80 प्रतिशत महिलाओं सहित कुल 61 विद्यार्थियों ने इस इंटर्नशिप को पूरा किया। इन विद्यार्थियों को 1,000 से अधिक आवेदकों में से चुना गया था। इनमें 18 राज्यों और दो केन्द्र-शासित प्रदेशों के विद्यार्थी शामिल थे।

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री वी. रामसुब्रमण्यन ने आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बी.आर. सारंगी और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समापन सत्र को संबोधित करते हुए इंटर्नशिप के सफल समापन पर विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को सूचनाओं तक जबरदस्त पहुंच का सर्वोत्तम और बेहद रचनात्मक उपयोग करना चाहिए। उन्हें जीवन में मानवीय मूल्यों को अपनाना चाहिए, जिसके बिना वे दूसरों के मानवाधिकारों का सम्मान नहीं कर सकते।

उन्होंने मानवाधिकारों का सम्मान व पालन करने की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा और संस्कृति की समृद्धि को रेखांकित किया, जो आजादी के तुरंत बाद भारत के संविधान में भी परिलक्षित हुआ, जो मनुष्यों के जन्म से ही उनके सभी अहस्तांतरणीय अधिकारों से मुक्ति दिलाता है। सभी को समान नागरिक और राजनीतिक अधिकार दिये गये; अस्पृश्यता समाप्त कर दी गई और महिलाओं सहित सभी को मतदान का अधिकार दिया गया।

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने कहा कि दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका में भी मानवाधिकारों के विकास को संवैधानिक और कानूनी रूप से साकार करने में वर्षों का संघर्ष लगा। 1776 में ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद 1865 में गुलामी को खत्म करने में 90 वर्ष लग गए, और उसके बाद 1956 में पृथक्करण कानून, जो अफ्रीकी-अमेरिकियों को श्वेत अमेरिकियों के बराबर सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति नहीं देती थी, को असंवैधानिक घोषित करने में और 90 वर्ष लग गए। इस संदर्भ में, उन्होंने एक श्वेत व्यक्ति के लिए अपनी बस की सीट छोड़ने से इनकार करने वाली एक अश्वेत नागरिक अधिकार कार्यकर्ता रूसा पार्क्स का हवाला दिया। पार्क्स के इस कदम ने अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन को गति दे दी, जिसे मार्टिन लूथर किंग जूनियर द्वारा 381 दिनों तक नगरपालिका की बसों की सवारी का बहिष्कार करके आगे बढ़ाया। इसके परिणामस्वरूप अंततः अश्वेत और श्वेत अमेरिकी नागरिकों के बीच अंतर करने वाले पृथक्करण कानून का अंत हो गया।

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा आयोजित 4-सप्ताह की शीतकालीन इंटर्नशिप-2024 संपन्न

ऑन-साइट फिजिकल इंटर्नशिप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बेहतर कुछ नहीं है, जो ऑनलाइन कार्यक्रम के उलट खुशी,  उदासी और मूल्य प्रणालियों को साझा करने की अनुमति देते हैं: जीवन कौशल किताबों द्वारा नहीं, बल्कि अंतर्वैयक्तिक संवाद द्वारा सीखे जाते हैं। उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि प्रशिक्षुओं में 80 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं और कहा कि ऐतिहासिक रूप से, महिलाओं ने मानवाधिकार आंदोलन का नेतृत्व किया है।

इससे पहले, भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के महासचिव श्री भरत लाल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से सहानुभूति, संवेदनशीलता और जवाबदेही के मूल मूल्यों को आत्मसात करने और प्रकट करने का आग्रह किया। इस इंटर्नशिप ने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठित वक्ताओं के माध्यम से मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं से परिचित होने का मौका  दिया। उन्होंने उनसे इंटर्नशिप के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग करने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर समाज को योगदान देने के उद्देश्य से मानवाधिकारों का विस्तार करने का आग्रह किया, जो सही मायने में एक ‘गुरु दक्षिणा’ होगी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के संयुक्त सचिव श्री देवेन्द्र कुमार निम ने  इंटर्नशिप की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर सत्रों के अलावा, प्रशिक्षुओं को दिल्ली में पुलिस स्टेशनों, तिहाड़ जेल, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और आशा किरण शेल्टर होम के दौरे पर ले जाया गया। इन गतिविधियों ने प्रशिक्षुओं को सरकारी संस्थानों के कामकाज, मानवाधिकार संरक्षण तंत्र और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी जमीनी हकीकत और जरूरतों के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। श्री निम ने पुस्तक समीक्षा, समूह शोध परियोजना प्रस्तुति और भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं की भी घोषणा की।

source: http://pib.gov.in

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