केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छठे अंतर्राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस (IAC–2025) का उद्घाटन किया
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छठे अंतर्राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। कृषि मंत्री ने स्मार्ट, सतत और लाभकारी कृषि की दिशा में सरकार की प्राथमिकताएँ साझा कीं और IAC-2025 डिक्लेरेशन जारी किया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के एनपीएल ऑडिटोरियम में छठे अंतर्राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस (IAC–2025) का उद्घाटन किया। यह तीन दिवसीय वैश्विक आयोजन भारतीय सस्य विज्ञान सोसाइटी (ISA) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) और ट्रस्ट फॉर ऐड्वांसमेंट ऑफ ऐग्रिकल्चरल साइंसेज (TAAS) के सहयोग से आयोजित किया गया।
कृषि मंत्री ने “IAC-2025 डिक्लेरेशन” जारी किया
कार्यक्रम के दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने “IAC–2025 डिक्लेरेशन” भी जारी किया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य, जल दक्षता, जैव विविधता, इको-न्यूट्रिशन और डिजिटल कृषि जैसे प्रमुख विषयों पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की दिशा में कृषि की आधारशिला स्मार्ट, सतत और लाभकारी कृषि होगी। मंत्री ने कृषि क्षेत्र में शोध और नवाचार के महत्व पर भी प्रकाश डाला और इसे किसानों की समस्याओं का समाधान करने के रूप में प्रस्तुत किया।
कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार का महत्व
श्री चौहान ने कहा कि “सस्य विज्ञान एक वैज्ञानिक शोध को किसान के खेत तक पहुंचाने का पुल है।” उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में बायो-फोर्टिफाइड और जीनोम-एडिटेड किस्मों के विकास की दिशा में और अधिक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों की प्राथमिक समस्याओं के आधार पर शोध का मार्ग तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ पर बल
कृषि मंत्री ने दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” की आवश्यकता की बात की। उन्होंने कहा कि दलहन में वायरस अटैक और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी को ध्यान में रखते हुए, इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
IAC-2025 डिक्लेरेशन की प्रमुख अनुशंसाएँ
श्री चौहान ने IAC-2025 डिक्लेरेशन में कुछ प्रमुख अनुशंसाएँ कीं, जैसे:
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मृदा–कार्बन संचयन और जल दक्षता आधारित खेती का प्रसार।
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AI आधारित डिजिटल कृषि समाधान और एग्री-स्टैक का विस्तार।
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प्राकृतिक और पुनर्योजी कृषि मॉडलों का समावेशन।
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युवा और महिला किसानों के लिए नवाचार कार्यक्रम।
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जलवायु-स्मार्ट भारतीय कृषि मॉडल का वैश्विक स्तर पर प्रसार।
केंद्रीय मंत्री श्री भागीरथ चौधरी का संदेश
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि सस्य विज्ञान का उद्देश्य किसानों की आय, पर्यावरण सुरक्षा और पोषण गुणवत्ता में सुधार करना होना चाहिए। उन्होंने हर नवाचार का अंतिम उपयोग खेत में होने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सस्य विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा
कांग्रेस में कुल 10 थीमैटिक सिम्पोज़िया आयोजित किए गए, जिनमें जलवायु-सहिष्णु कृषि, कार्बन-न्यूट्रल फार्मिंग, डिजिटल कृषि समाधान, पोषण-संवेदनशील कृषि, लैंगिक सशक्तिकरण और कृषि 5.0 जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। इन सत्रों में SDGs (Sustainable Development Goals) की प्राप्ति के लिए सस्य विज्ञान के योगदान पर विस्तृत विचार किया गया।
भारत को वैश्विक कृषि नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना
इस कांग्रेस में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, DARE और महानिदेशक, ICAR ने कहा कि भारत का सस्य विज्ञान अनुसंधान जलवायु-स्मार्ट कृषि के वैश्विक नेतृत्व में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। IAC-2025 के निष्कर्ष ICAR Vision-2050 के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
वैश्विक कृषि सहयोग और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करना
कांग्रेस के निष्कर्ष G20, FAO, CGIAR और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करेंगे, जो भारत को जलवायु-स्मार्ट और स्मार्ट कृषि-खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करेगा।