केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कोयम्बटूर में कपास उत्पादकता सुधार बैठक
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोयम्बटूर में कपास उत्पादकता बढ़ाने की बैठक की अध्यक्षता की। मिशन कॉटन, उन्नत बीज, टीम कॉटन और तकनीक हस्तांतरण पर विस्तारपूर्ण चर्चा हुई।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कोयम्बटूर स्थित आईसीएआर‑गन्ना प्रजनन संस्थान में कपास की उत्पादकता बढ़ाने को लेकर एक शक्तिशाली बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे, कृषि विश्वविद्यालयों के वाइस‑चांसलर, ICAR प्रमुख एम.एल. जाट, किसान, वैज्ञानिक और उद्योग हितधारक उपस्थित रहे।
किसानों की आवाज़: खेतों से उठती वास्तविक चुनौतियाँ
बैठक से पूर्व मंत्री चौहान ने सीधे खेतों का दौरा कर कपास उत्पादक किसानों से बातचीत की। उन्होंने किसानों के सामने आई समस्या—जैसे वायरस-प्रतिरोधी बीजों की कमी, उत्पादन में गिरावट—को भलीभांति समझा। इसके बाद बैठक की शुरुआत किसानों की वास्तविक चुनौतियों और सुझावों पर आधारित हुई।
“रोटी के बाद सबसे ज़रूरी है कपड़ा” – शिवराज सिंह चौहान
शिवराज सिंह चौहान ने उद्घाटन भाषण में कहा:“रोटी के बाद कपड़ा हमारी जीवन की मूल आवश्यकता है और वह कपास से बनता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कपास कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आत्मा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बीटी-कॉटन किस्मों में वायरस अटैक की वजह से उत्पादकता गिर रही है। इसलिए हमें उन्नत बीज विकसित कर समय रहते किसानों तक पहुंचाने की प्राथमिकता देनी होगी।
मिशन कॉटन: टीमवर्क से लक्ष्य 2030 से पहले
मंत्री ने घोषणा की कि “टीम कॉटन” गठित की जाएगी, जिसमें शामिल होंगे: कृषि मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, ICAR, किसान, उद्योग संगठन, बीज उद्योग और मशीनीकरण एजेंसियों के प्रतिनिधि। उद्देश्य है लॉंग-स्टेपल और उच्च गुणवत्ता वाले कपास का उत्पादन बढ़ाना और 2030 से पहले मिशन कॉटन को साकार करना।
अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और राज्यवार बैठकें
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि:
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ड्रोन, IoT, डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकें कपास वृद्धि में सहायक होंगी।
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फसलवार एवं राज्यवार बैठकें की जाएँ—सोयाबीन के बाद अब कपास पर विशेष चर्चा।
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ICAR, कृषि विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स के सहयोग से तकनीकी हस्तांतरण होगा।
संतुलित पॉलिसी: किसानों की आय और कृषी उद्योग दोनों का लाभ
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट संदेश दिया:“अगर विदेशी कपास सस्ते दामों में आएगा, तो किसानों की कीमत घट जाएगी। इसलिए नीति विन्यास में हम किसान और कपड़ा उद्योग दोनों को ध्यान में रखेंगे।“ उन्होंने कहा कि कपास उत्पादन और कपड़ा निर्यात में आत्मनिर्भरता पर जोर रहेगा।