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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना” की केंद्रीय मंत्रिमंडल मंजूरी पर महत्वपूर्ण बयान दिया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना” की केंद्रीय मंत्रिमंडल मंजूरी पर महत्वपूर्ण बयान दिया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना की केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी पर महत्वपूर्ण बयान दिया। जानिए कैसे यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को सशक्त बनाने में मदद करेगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा “प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना” की मंजूरी पर मीडिया को वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा कि इस योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है, जो कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम है।

श्री चौहान ने बताया कि खाद्यान्न उत्पादन में पिछले वर्षों में 40% से अधिक वृद्धि हुई है, साथ ही फल, दूध और सब्जियों का उत्पादन भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। लेकिन, विभिन्न राज्यों और जिलों में उत्पादकता में भारी अंतर है। ऐसे जिलों की पहचान की जाएगी जहां कृषि उत्पादन कम है या किसान लोन की पहुँच कम है। उन जिलों में केंद्र और राज्य सरकार की लगभग 11 विभागीय योजनाओं को कन्वर्जन (अभिसरण) के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हर राज्य से कम से कम एक जिला इस योजना में शामिल होगा और प्रत्येक जिले के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। जुलाई माह में यह निर्णय लिया जाएगा कि कौन-कौन से जिले और नोडल अधिकारी योजना के अंतर्गत होंगे, जबकि अगस्त में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। साथ ही किसानों और अधिकारियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे।

मंत्री ने यह भी कहा कि नीति आयोग द्वारा जिलों की प्रगति पर नजर रखने के लिए एक मॉनिटरिंग डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। योजना का औपचारिक रूप से अक्टूबर के रबी सत्र से शुभारंभ किया जाएगा। प्रत्येक जिले में ग्राम पंचायत या जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति गठित होगी, जिसमें विभागीय अधिकारी, प्रगतिशील किसान और अन्य सदस्य शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्य और केंद्रीय स्तर पर भी टीम बनाई जाएगी जो योजनाओं के कुशल अभिसरण को सुनिश्चित करेगी।

श्री चौहान ने जोर देते हुए कहा कि इसका लक्ष्य केवल राष्ट्रीय औसत उत्पादकता बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचना है। योजना में फसल उत्पादन के साथ-साथ फल, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और कृषि वानिकी जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा। यह योजना किसानों के लिए एक बड़ा अवसर और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास का माध्यम बनेगी।

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