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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती समारोह में संबोधन और स्मारक सिक्का जारी किया

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती समारोह में संबोधन और स्मारक सिक्का जारी किया

उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती समारोह में संबोधित किया और स्मारक सिक्का जारी किया।

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित समारोह में भगवान श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती पर अपने विचार साझा किए और उनके सम्मान में एक स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने महर्षि के योगदान और शिक्षाओं को आधुनिक भारत के आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में महत्वपूर्ण बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रमण महर्षि का जीवन और उपदेश सत्य, आत्मज्ञान और आंतरिक स्वतंत्रता की भारत की शाश्वत खोज का प्रतीक हैं। उन्होंने महर्षि द्वारा आत्मविचार और आंतरिक जागरूकता पर दिए गए उपदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, जो न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी साधकों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।

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श्री राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि रमण महर्षि की करुणा सभी जीवित प्राणियों के प्रति समान रूप से व्याप्त थी, जो भारत की सभ्यतागत और सार्वभौमिक सद्भाव की परंपरा को मजबूत करती है। उन्होंने तिरुवनमलाई स्थित श्री रमण आश्रम और विश्वभर के रमण केंद्रों की भूमिका की प्रशंसा करते हुए उनके सामुदायिक सेवा कार्यों – नि:शुल्क चिकित्सा, साधुओं और जरूरतमंदों को भोजन, और पर्यावरण संरक्षण – पर प्रकाश डाला।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वित्त मंत्रालय द्वारा जारी स्मारक सिक्का महर्षि के शाश्वत आध्यात्मिक प्रभाव और श्री रमण आश्रम की ऐतिहासिक भूमिका का सम्मान है। यह केवल मुद्रात्मक सम्मान नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और आंतरिक जागृति के संदेश को स्थायी रूप से संरक्षित करने का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने भक्तों और अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि महर्षि के आदर्शों – सादगी, आत्म-जागरूकता और दयालुता – को अपने जीवन में अपनाने में निहित है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भगवान की शिक्षाएं राष्ट्र को सद्भाव, ज्ञान और आंतरिक शक्ति की ओर मार्गदर्शन करती रहेंगी।

इस अवसर पर श्री रमण आश्रम, तिरुवनमलाई के अध्यक्ष डॉ. वेंकट एस. रामानन, रमण केंद्र दिल्ली के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के. राममूर्ति (सेवानिवृत्त) सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

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