राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन 2026: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सरकार, उद्योग और समाज के सहयोग पर दिया जोर
राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन 2026 में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सरकार, उद्योग और समाज के सहयोग पर जोर दिया।
राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) शिखर सम्मेलन 2026 में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि किसी राष्ट्र के विकास और परिवर्तन के लिए सरकार, उद्योग और समाज का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने CSR को ‘राष्ट्र निर्माण की पूंजी’ के रूप में विकसित करने का आह्वान किया और कॉर्पोरेट जगत से लाभ और उद्देश्य को साथ-साथ चलाने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन में कहा कि जब संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने विश्व की दसवीं अर्थव्यवस्था से चौथी अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा पूरी की है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan graced the National CSR Summit 2026 organised by the Times Foundation at Bharat Mandapam, New Delhi today.
The Vice President in his address said that Corporate Social Responsibility is no longer peripheral to business; it is central to… pic.twitter.com/PZLfTWjOKU
— Vice-President of India (@VPIndia) February 21, 2026
सीएसआर को राष्ट्र निर्माण में केंद्र में रखा जाए
उपराष्ट्रपति ने CSR को राष्ट्रीय प्रगति और विकास के केंद्र में रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि CSR केवल कानूनी दायित्व नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि CSR के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला नेतृत्व वाले उद्यम, कौशल विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसी पहलों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “जब आप कोई संकल्प लेते हैं, तो उसे पूरा करें। लाभ और सामाजिक उद्देश्य को साथ लेकर ही स्थायी और समावेशी विकास संभव है।” उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से आग्रह किया कि वे CSR को व्यय के रूप में न देखें बल्कि इसे राष्ट्रीय पूंजी और सामाजिक प्रभाव के रूप में अपनाएं।
नवाचार और समावेशन से होगा दीर्घकालिक विकास
राधाकृष्णन ने कहा कि भारत अब प्रौद्योगिकी अपनाने वाले देश से नवप्रवर्तन करने वाला देश बन रहा है। उन्होंने नवाचार, समावेशन और स्थिरता को एक दूसरे का सुदृढ़क बताया। साथ ही, उन्होंने मीडिया संस्थानों से सकारात्मक विकास खबरों को अधिक स्थान देने का आग्रह किया ताकि जनता के बीच विश्वास और जवाबदेही बढ़े।
उपराष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन का सार बताते हुए कहा कि सरकार, उद्योग और समाज का सामूहिक प्रयास ही राष्ट्र परिवर्तन और दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्यों को साकार कर सकता है। उन्होंने CSR को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक शक्तिशाली उपकरण मानने की बात कही।