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केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मत्स्य पालन क्षेत्र में सुधारों पर हितधारक परामर्श की अध्यक्षता की

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मत्स्य पालन क्षेत्र में सुधारों पर हितधारक परामर्श की अध्यक्षता की

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मत्स्य पालन क्षेत्र में सुधारों के लिए आयोजित हितधारक परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात बढ़ाने के लिए सुधार रोडमैप पर चर्चा की गई।

 केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने मंत्रालय के अंतर्गत एक हाइब्रिड मोड में आयोजित हितधारक परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र में चार महत्वपूर्ण सुधार क्षेत्रों – विधायी, नीतिगत, संस्थागत और प्रक्रियागत सुधारों पर सुझाव प्राप्त करना था।

इस बैठक का संचालन मत्स्य पालन विभाग के सचिव श्री अभिलक्ष लिखी ने किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के 2047 तक विकसित होने के दृष्टिकोण के अनुरूप मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात संवर्धन में सुधार करना था।

केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह का संबोधन

श्री राजीव रंजन सिंह ने बैठक में कहा कि हितधारकों के सुझावों से मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए सुधार रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी, ताकि उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात को बढ़ाया जा सके। उन्होंने अंतर्देशीय राज्यों की अप्रयुक्त निर्यात क्षमता को अनलॉक करने और समुद्री खाद्य निर्यात पोर्टफोलियो को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में किए गए जीएसटी सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम मत्स्य पालन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे देश में मत्स्य उत्पादकता को 5 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 7 टन प्रति हेक्टेयर करने के लिए सामूहिक प्रयास करें, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे।

श्री सिंह ने निर्यात बाजार में विविधता लाने, उत्पाद प्रमाणन, मत्स्य प्रसंस्करण में प्रौद्योगिकी एकीकरण, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचा निर्माण और ट्रेसेबिलिटी प्रणाली के निर्माण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र देश में 8 करोड़ से अधिक लोगों के लिए आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है।

सचिव श्री अभिलक्ष लिखी का संबोधन

सचिव श्री अभिलक्ष लिखी ने अपने संबोधन में मत्स्य पालन क्षेत्र की अप्रयुक्त निर्यात क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों, मछुआरा संघों, निर्यातकों और उद्योग निकायों से सहयोग की अपील की और कार्यान्वयन योग्य सुझाव देने की बात की।

हितधारकों से प्राप्त इनपुट्स और चर्चा के बिंदु

बैठक में विभिन्न हितधारकों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिनमें क्वारंटाइन केंद्रों का विकास, प्रौद्योगिकी के उपयोग से मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण क्षमताओं में वृद्धि, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का निर्माण और एकल खिड़की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।

इसके अलावा, समुद्री और अंतर्देशीय जलीय कृषि के विस्तार, बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। उन्होंने देश में निर्यात सुविधा काउंटरों की स्थापना, बीज बैंकों का विकास और किसानों के लिए ऋण की बेहतर पहुंच जैसे मुद्दों पर भी विचार किए।

भविष्य में ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्र

बैठक में यह भी तय किया गया कि क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, उभरती नौकरी भूमिकाओं के लिए क्षमता निर्माण, और खारे पानी की कृषि का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा, बाजार लचीलापन बढ़ाने, उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात में विविधता लाने और ब्रांड इंडिया को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

यह बैठक राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, एनएफडीबी, एमपीईडीए, आईसीएआर संस्थानों, तटीय जल कृषि प्राधिकरण, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण, मछुआरा संघों और उद्योग निकायों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों के व्यापक प्रतिनिधिमंडल द्वारा भाग लिया गया।

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