राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को दी प्रेरक सलाह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को शिक्षा, नवाचार और समाज सेवा के महत्व पर प्रेरित किया।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और छात्रों को शिक्षा, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की सेवा का भी मार्ग है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छात्रों को याद दिलाया कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे अलग-अलग क्षेत्रों में अपना करियर बनाएंगे – चाहे वह सरकारी या निजी क्षेत्र हो, अनुसंधान, उच्च शिक्षा, शिक्षण, या उद्यमिता। उन्होंने बताया कि हर क्षेत्र में प्रगति के लिए कुछ गुण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जैसे – सीखने की निरंतर इच्छा, नैतिकता, सत्यनिष्ठा, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने की क्षमता, टीम वर्क, संसाधनों का सही उपयोग और ज्ञान का समाज एवं राष्ट्र हित में प्रयोग।
उन्होंने जोर दिया कि ये गुण न केवल छात्रों को एक सफल व्यवसायी बनाएंगे, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। राष्ट्रपति ने कहा, “जिस समाज ने हमें शिक्षा दी, उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी है कि हम उसकी सेवा करें।” उन्होंने छात्रों से कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए योगदान करना शिक्षा का सर्वोत्तम उपयोग है।
राष्ट्रपति ने भारतीय युवाओं की उद्यमशीलता और नवाचार की सराहना करते हुए बताया कि पिछले दशक में भारत ने कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में प्रगति की है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपील की कि वे नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा दें, उद्योग-अकादमिक सहयोग मजबूत करें और समाज के लिए प्रासंगिक नवाचारों का समर्थन करें।
साथ ही, राष्ट्रपति ने पंजाब में युवाओं में बढ़ते मादक पदार्थों के सेवन की समस्या पर चिंता व्यक्त की और उच्च शिक्षा संस्थानों से छात्रों को सही दिशा देने की भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगले दो दशक भारत के विकास में निर्णायक होंगे और इसके लिए वैज्ञानिक सोच, जिम्मेदारी और निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले युवा अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रपति ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना पर भी प्रकाश डाला, जो श्री गुरु नानक देव जी की 500वीं जयंती के अवसर पर हुई थी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के उपदेश समाज और मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में छात्राओं की अधिक संख्या और उनके योगदान से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन का समापन इस संदेश के साथ किया कि शिक्षा और नवाचार केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए उपयोग में लाना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने ज्ञान, क्षमताओं और उद्यमिता से देश को मजबूत बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।