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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तिरुवनंतपुरम में नौसेना दिवस 2025 समारोह में भाग लिया, भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तिरुवनंतपुरम में नौसेना दिवस 2025 समारोह में भाग लिया, भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तिरुवनंतपुरम में नौसेना दिवस 2025 समारोह में भाग लिया, भारतीय नौसेना की भूमिका, समुद्री सुरक्षा, स्वदेशी तकनीकी विकास और ब्लू इकोनॉमी के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित नौसेना दिवस 2025 समारोह में भाग लिया और भारतीय नौसेना के ऑपरेशनल प्रदर्शन का अवलोकन किया। इस दौरान, राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना की निस्वार्थ सेवा, बलिदान और समर्पण की सराहना की और उसे राष्ट्र के प्रति महत्वपूर्ण योगदान के रूप में प्रस्तुत किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, “नौसेना दिवस, हमारे वीर नौसेना कर्मियों द्वारा किए गए निस्वार्थ कार्य और उनके सर्वोच्च बलिदान का उत्सव है। देशवासियों की ओर से हम भारतीय नौसेना के जवानों की समर्पण भावना, व्यावसायिकता और देशभक्ति को सलाम करते हैं।”

हिंद महासागर में भारत की भूमिका

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह भी कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र एक अत्यंत सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के प्रमुख मार्ग के रूप में कार्य करता है। उन्होंने यह रेखांकित किया कि भारत का स्थान हिंद महासागर के केंद्र में होने के कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति भारत का विशेष दायित्व है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, “भारत महासागरों को मुक्त, स्थिर और नियम-आधारित बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” इसके साथ ही उन्होंने भारत के वसुधैव कुटुम्बकम सिद्धांत के अनुसार, भारत का दृष्टिकोण प्रतिस्पर्धात्मक के बजाय सहयोगात्मक होने पर बल दिया।

भारतीय नौसेना की सामरिक भूमिका

राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना की भूमिका को भी उजागर किया, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और समुद्री डकैती से निपटने के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना न केवल पारंपरिक रक्षा कार्यों में, बल्कि समुद्रों के शांतिपूर्ण उपयोग और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा में भी अग्रणी है।

“समुद्री संकटों के दौरान, भारतीय नौसेना ने न केवल नागरिकों को बचाया बल्कि मानवीय सहायता पहुँचाने में भी प्रमुख भूमिका निभाई है। इसकी मदद से हम हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग का माहौल बनाते हैं,” राष्ट्रपति ने कहा।

सागर (एसएजीएआर) पहल और ब्लू इकोनॉमी

राष्ट्रपति ने सागर (Security and Growth for All in the Region) परिकल्पना के तहत की जा रही पहलों की सराहना की, जो समुद्री क्षेत्र में जागरूकता और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री समुदाय की सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, उन्होंने समुद्री अर्थव्यवस्था या ब्लू इकोनॉमी की क्षमता को स्थायी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना इन प्रयासों में केंद्रीय भूमिका निभाती है। भारतीय नौसेना समुद्री मार्गों की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों की रक्षा, अवैध गतिविधियों की रोकथाम, और समुद्री अनुसंधान में योगदान करके सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ महासागरों की परिकल्पना को साकार करती है।

स्वदेशी तकनीकी विकास और आधुनिकीकरण

राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी तकनीकों के विकास में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना स्वदेशी प्लेटफार्मों के डिज़ाइन और निर्माण में नई ऊंचाइयाँ छू रही है। राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना की यह क्षमता विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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