प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 2024 बैच के आईएफएस प्रशिक्षु अधिकारियों की मुलाकात: वैश्विक भूमिका और संचार में भारत की दिशा पर चर्चा
भारत की वैश्विक भूमिका और विश्वबंधु की सोच
प्रधानमंत्री ने वैश्विक दृष्टिकोण से भारत की विशिष्ट भूमिका पर चर्चा की, जो एक “विश्वबंधु” के रूप में उभरा है, और सभी देशों के साथ मित्रता बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे भारत जरूरतमंद देशों के लिए सबसे पहले सहायता प्रदाता के रूप में उभरा है, और किस तरह भारत ने वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए क्षमता निर्माण में योगदान दिया है।
आईएफएस अधिकारियों का भविष्य और 2047 का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आगामी विदेश नीति के उभरते क्षेत्रों और वैश्विक मंच पर भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को भारत के 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की दिशा में अपने योगदान का महत्व बताया और भविष्य के राजनयिकों के रूप में उनके कर्तव्यों को रेखांकित किया।
प्रौद्योगिकी-संचालित दुनिया में संचार और डिजिटल कूटनीति
प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी-संचालित दुनिया में संचार के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से आग्रह किया कि वे प्रवासी भारतीयों के साथ प्रभावी संचार के लिए सभी मिशनों की वेबसाइटों को जानें और इसमें सुधार के लिए प्रयास करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि “अपने भारत को जानें” प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद के माध्यम से विभिन्न देशों के युवाओं में भारत के प्रति जिज्ञासा पैदा की जानी चाहिए।
भारत के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरते अवसर
प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स को अन्य देशों में अवसर तलाशने और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को और विस्तारित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका मानना है कि भारत के पास अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की पूरी क्षमता है।