केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नेशनल वन हेल्थ मिशन असेंबली 2025 का उद्घाटन किया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नेशनल वन हेल्थ मिशन असेंबली 2025 में उद्घाटन भाषण दिया, महामारी तैयारी और वन हेल्थ दृष्टिकोण पर जोर।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने आज भारत मंडपम, दिल्ली में आयोजित नेशनल वन हेल्थ मिशन असेंबली 2025 में उद्घाटन भाषण दिया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का विषय था: “ज्ञान को व्यवहार में लाना – वन अर्थ, वन हेल्थ, वन फ्यूचर”।
वन हेल्थ दृष्टिकोण: “वन अर्थ, वन हेल्थ, वन फ्यूचर”
श्री नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह थीम केवल एक स्लोगन नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को मज़बूत करने और भविष्य की महामारियों के खिलाफ तैयारी बढ़ाने का आधार है। उन्होंने जोर दिया कि यह दृष्टिकोण मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि सहित कई क्षेत्रों में एकीकृत कार्रवाई और सहयोग को बढ़ावा देता है।
भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियां और नवाचार
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पिछले दशक में भारत के स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत वैक्सीन और निदान के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बन चुका है। इसमें शामिल हैं: कोवैक्सिन, कोविशील्ड, कॉर्बेवैक्स और दुनिया का पहला इंट्रानेजल कोविड-19 टीका। इसके अलावा, उन्होंने भारत में एमआरएनए, डीएनए, वायरल वेक्टर और बायोसिमिलर वैक्सीन प्लेटफॉर्म में प्रगति का उल्लेख किया।
निदान के क्षेत्र में ट्रूनेट, पैथोडिटेक्ट और CRISPR-आधारित परीक्षणों ने रोग पहचान को तेज़, सटीक और सुलभ बनाया है। उन्होंने जीनोमिक निगरानी और CoWIN डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता का भी जिक्र किया।
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नेशनल वन हेल्थ मिशन का महत्व
नेशनल वन हेल्थ मिशन (NOHM) 16 केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों/विभागों को एकीकृत करता है, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, औषधि, रक्षा, पृथ्वी विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और आपदा प्रबंधन शामिल हैं।
मंत्री जेपी नड्डा ने मिशन के तहत 23 BSL-3 और BSL-4 प्रयोगशालाओं के राष्ट्रीय नेटवर्क की स्थापना का उल्लेख किया, जो उभरते रोगजनकों की शीघ्र पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि मिशन महामारी से लड़ने की तैयारी में भारत के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
संयुक्त प्रशिक्षण और नई विशेषज्ञ पीढ़ी
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल ने सभा को बताया कि जूनोटिक और जलवायु-संवेदनशील रोगों से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों में समन्वित और त्वरित प्रतिक्रिया आवश्यक है।
उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण और इकोसिस्टम-व्यापी क्षमता निर्माण के माध्यम से वन हेल्थ विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य है कि मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को सशक्त और एकीकृत ढांचे में सुरक्षित किया जा सके।
सहयोग और साझा प्रयास
श्री नड्डा ने इस अवसर पर सभी हितधारकों – सरकार, शिक्षा संस्थान, उद्योग और नागरिक समाज – को स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और वन हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सहयोग की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह सभा सहयोग, नवाचार और तैयारी की भावना का प्रतीक है और भारत को भविष्य की महामारियों से निपटने और सुरक्षित स्वास्थ्य प्रणाली सुनिश्चित करने में मार्गदर्शन करेगी।