हरियाणा में मानसून से पहले बाढ़ नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश, 388 योजनाओं को मिली मंजूरी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून से पहले बाढ़ नियंत्रण के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। 637.25 करोड़ की 388 योजनाओं को मंजूरी, ड्रेनों की सफाई और स्टोन स्टड निर्माण का जोर।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून से पहले राज्य में जलभराव और बाढ़ की संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी ड्रेनों की समय पर सफाई सुनिश्चित की जाए और यदि किसी परियोजना में देरी या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे बाढ़ नियंत्रण से संबंधित सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 57वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें कुल 637.25 करोड़ रुपये की 388 बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें जिला उपायुक्तों द्वारा प्रस्तावित 59 योजनाएं (102 करोड़ रुपये) भी शामिल हैं। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में प्रदेश में जलभराव और बाढ़ की गंभीर घटनाओं से सबक लेकर अब से बाढ़ राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिया कि किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
नदियों के तटबंध और स्टोन स्टड निर्माण
मुख्यमंत्री ने नदियों के किनारे तटबंधों को मजबूत करने और भूमि कटाव रोकने के लिए उत्तर प्रदेश मॉडल के स्टोन स्टड निर्माण की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया। सभी स्टड इस वर्ष नई तकनीक से बनाए जाएंगे और कटाव की आशंका वाले क्षेत्रों में तुरंत उपयोग के लिए बजरी से भरे कट्टे तैयार रखे जाएंगे।
यमुना में गंदा पानी न जाने पाए
मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि यमुना नदी में सीवेज और नालों का गंदा पानी सीधे न छोड़ा जाए। केवल ट्रीटमेंट के बाद ही जल निकासी की अनुमति होगी। इसके लिए सभी आउटफॉल प्वाइंट्स की पहचान की जाए और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP) के निर्माण में तेजी लाई जाए। उन्होंने भिवानी-घग्गर ड्रेन की क्षमता बढ़ाने के काम को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
बढ़ती बाढ़ राहत परियोजनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने उन योजनाओं की समीक्षा भी की, जो समय पर पूरी नहीं हो सकीं। अधिकारियों को सभी अधूरी योजनाओं को जल्द पूरा करने और जनवरी के अंत तक टेंडर लगाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने ट्रीटेड वॉटर के कृषि और औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं को तलाशने के लिए संबंधित विभागों को भी निर्देशित किया।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, वित्त आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और शहरी संपदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
हरियाणा सरकार का यह कदम प्रदेश में जलभराव और बाढ़ से प्रभावी ढंग से निपटने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।