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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वंदे मातरम के 150 साल: देशभक्ति और बलिदान की अमिट विरासत पर दी विस्तारपूर्ण जानकारी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वंदे मातरम के 150 साल: देशभक्ति और बलिदान की अमिट विरासत पर दी विस्तारपूर्ण जानकारी

हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वंदे मातरम 150 साल की देशभक्ति, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर चर्चा की, कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति की आलोचना की।

हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वंदे मातरम पर विशेष चर्चा करते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व, देशभक्ति और बलिदान की भावना पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम और भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, और इसकी 150 साल की यात्रा राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है।

मुख्यमंत्री ने सदस्यों का धन्यवाद करते हुए कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रेरक मंत्र रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विधानसभा में इस गीत की स्मृति भविष्य की पीढ़ियों को साहस, अनुशासन और देशभक्ति की सीख देती है।

वंदे मातरम का इतिहास और महत्व

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को प्रकाशित हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने में इस गीत की भूमिका अहम रही। 1936 में बर्लिन ओलंपिक जीतने के बाद भारतीय हॉकी टीम द्वारा इसका गायन राष्ट्रीय गौरव को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस 150 वर्षों की यात्रा में गौरवपूर्ण क्षणों के साथ-साथ कठिन दौर भी आए, जैसे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और आपातकाल। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतिरोध और क्रांतिकारी चेतना का प्रतीक रहा।

हरियाणा और क्रांतिकारी योगदान

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राव तुला राम ने 1857 में रेवाड़ी से प्रतिरोध का नेतृत्व किया। झज्जर, रोहतक, हिसार और अंबाला के किसानों और सैनिकों ने अंग्रेजों का डटकर सामना किया। लाला लाजपत राय और आर्य समाज आंदोलन ने भी हरियाणा में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।

महात्मा गांधी और राष्ट्रीय एकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1905 में महात्मा गांधी के आह्वान पर वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बन गया और लाखों लोगों को भारत के लिए एकजुट होने के लिए प्रेरित किया।

कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति और विवाद

श्री सैनी ने कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम की पवित्रता को कमजोर करने की आलोचना की। 1937 में मुस्लिम लीग के विरोध के बाद कांग्रेस नेतृत्व इसे बचाने में असफल रहा, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ और यह राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में विवादित भी हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 150वीं वर्षगांठ

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 7 नवंबर 2025 को वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ का वर्षभर चलने वाला उत्सव शुरू किया गया। इसमें स्मारक डाक टिकट और सिक्के भी जारी किए गए।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ये 150 साल केवल इतिहास याद करने के लिए नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर, विकसित और मजबूत भारत बनाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रनिर्माण के वास्तविक मायने में सम्मानित होगा। इस अवसर पर उन्होंने वीर शहीदों को भी नमन किया।

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