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डॉ. जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में पहले स्वदेशी पायलट प्रशिक्षण विमान ‘हंसा-3 एनजी’ का उद्घाटन किया, सारस एमके-2 और अन्य स्वदेशी नवाचारों का शुभारंभ

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में पहले स्वदेशी पायलट प्रशिक्षण विमान ‘हंसा-3 एनजी’ का उद्घाटन किया, सारस एमके-2 और अन्य स्वदेशी नवाचारों का शुभारंभ

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में हंसा-3 एनजी पायलट प्रशिक्षण विमान का उद्घाटन किया, साथ ही स्वदेशी विमान निर्माण के क्षेत्र में भारत की नई दिशा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 30 नवंबर 2025 को बेंगलुरु स्थित सीएसआईआर-एनएएल में पहले स्वदेशी पायलट प्रशिक्षण विमान ‘हंसा-3 एनजी’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विमानन क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास की दिशा में भारत की नई उपलब्धियों की सराहना की। डॉ. सिंह ने विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह कदम भारत को वैश्विक विमानन रैंकिंग में शीर्ष 3 देशों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

हंसा-3 एनजी और स्वदेशी विमान निर्माण

हंसा-3 एनजी भारत का पहला पूरी तरह से कंपोजिट एयरफ्रेम वाला दो-सीटर पायलट प्रशिक्षण विमान है, जिसे पायलट ट्रेनिंग के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है। यह विमान भारतीय विमानन उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस विमान के निर्माण मॉडल को लेकर कई उद्योग साझेदार काम कर रहे हैं और आंध्र प्रदेश के कुप्पम में एक नया संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जिसमें हर साल लगभग 100 विमानों का निर्माण होगा।

सारस एमके-2 और क्षेत्रीय विमानन की दिशा

केंद्रीय मंत्री ने सारस एमके-2 विमान के लिए बनाई गई आयरन बर्ड सुविधा का उद्घाटन किया। यह सुविधा विमान की सभी प्रणालियों के परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे उड़ान परीक्षण से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है और विकास की गति तेज की जा सकती है। सारस एमके-2 भारत का 19-सीटर शॉर्ट-हॉल यात्री विमान है, जिसे सीएसआईआर-एनएएल ने विकसित किया है। यह विमान असैन्य और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी होगा और भारतीय क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क को सशक्त करेगा।

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स्वदेशी मौसम तकनीक और मानव रहित विमान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एचएएल हवाई अड्डे पर नवीमेट प्रणाली का उद्घाटन किया, जो भारतीय हवाई अड्डों पर विमानन सुरक्षा को बेहतर बनाएगी। यह प्रणाली वास्तविक समय दृश्यता और मौसम मापदंड प्रदान करने में सक्षम है। इसके अतिरिक्त, डॉ. सिंह ने भारत द्वारा सौर ऊर्जा से चलने वाले मानव रहित विमान के विकास के प्रयासों का उल्लेख किया, जो 20 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होंगे।

रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा

डॉ. सिंह ने स्वदेशी 150 किलोग्राम श्रेणी के लोइटरिंग म्यूनिशन यूएवी के विकास को औपचारिक रूप दिया। यह यूएवी भारतीय रक्षा विनिर्माण के बढ़ते आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, और इसका विकास सीएसआईआर-एनएएल और मेसर्स सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के सहयोग से हुआ है। यह यूएवी 900 किलोमीटर की रेंज, 6-9 घंटे की उड़ान क्षमता, और एआई-सक्षम लक्ष्य पहचान जैसी क्षमताओं से लैस होगा।

सीएसआईआर-एनएएल और भविष्य की दिशा

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआईआर-एनएएल और निजी उद्योग के बीच सहयोग से स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और व्यवहार्य बनाया जा रहा है। उन्होंने भारत के बढ़ते एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में सीएसआईआर-एनएएल के योगदान की सराहना की और संस्थान को निवेशकों और युवा उद्यमियों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

भारत का भविष्य: वैश्विक विमानन केंद्र

डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज की प्रदर्शित तकनीकी उपलब्धियां भारत के विमानन भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2035 तक भारत वैश्विक विमानन केंद्र बन जाएगा, और 2047 तक यह एक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह स्वदेशी विमान निर्माण और वायुयान प्रौद्योगिकियों में विकास के अगले चरण में और भी बड़े मील के पत्थर हासिल होंगे।

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