राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया, ‘राजाजी उत्सव’ का शुभारंभ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। राजाजी उत्सव की शुरुआत, प्रदर्शनी 1 मार्च तक आम जनता के लिए खुली।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति की उपस्थिति भी रही। प्रतिमा को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक अशोक मंडप क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जो भारतीय विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का प्रतीक है।
प्रतिमा अनावरण के साथ ही राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ की शुरुआत की गई। इस उत्सव के अंतर्गत राजगोपालाचारी के जीवन, योगदान और विचारों पर आधारित फोटो प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी तथा एक विशेष वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया। यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, राजगोपालाचारी जैसे महान व्यक्तित्व देशवासियों को नैतिकता, सादगी और राष्ट्रहित के मूल्यों से प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि राजाजी का जीवन भारतीय आत्मनिर्भरता, स्वराज और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उल्लेख किया कि राजाजी ने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को प्राथमिकता दी। उन्होंने मानसिक स्वतंत्रता और आत्मगौरव को बढ़ावा देने का संदेश दिया, जो आज भी प्रासंगिक है। राष्ट्रपति भवन में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह परिसर भारत की लोकतांत्रिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि यह आयोजन देश के इतिहास और विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर हो रहे परिवर्तन देश की सांस्कृतिक पुनर्स्थापना और आत्मविश्वास को दर्शाते हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी पढ़ा गया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और राजाजी के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं, और उनकी प्रतिमाओं का आमने-सामने स्थापित होना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एकता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहल औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को हटाने और भारतीय गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। उनके अनुसार, ऐसे कार्यक्रम देश की लोकतांत्रिक भावना को और मजबूत करते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।
राजाजी उत्सव के दौरान उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य राजगोपालाचारी के योगदान को व्यापक रूप से जनता तक पहुंचाना और उनके विचारों को नई पीढ़ी से जोड़ना है।
राष्ट्रपति भवन प्रशासन ने बताया कि यह परिसर अब नागरिकों के लिए अधिक खुला और सुलभ है तथा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।