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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में अरावली ग्रीन वॉल और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “अरावली ग्रीन वॉल को मजबूती” के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। सम्मेलन का उद्देश्य अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और इसके संरक्षण के लिए रणनीतियों पर व्यापक चर्चा करना है। इस अवसर पर संकल्प फाउंडेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन” भी जारी की गई।

अरावली ग्रीन वॉल पहल के तहत भारत का दृष्टिकोण

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट के माध्यम से 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को उर्वर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस परियोजना के तहत अरावली क्षेत्र में लगभग 6.45 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि की पहचान की गई है। इनमें से 2.7 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में हरियाली का कार्य शुरू हो चुका है।

इस पहल को लागू करने के लिए अरावली के 29 जिलों के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर जिम्मेदार हैं, और इसमें स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में स्थायी हरियाली सुनिश्चित की जा सके।

ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व

श्री यादव ने हरियाणा में नौरंगपुर से नूंह तक फैली 97 वर्ग किलोमीटर खराब अरावली राजस्व भूमि को वनीकरण के लिए चिन्हित करने और इसे संरक्षित वन घोषित करने के निर्णय को आजादी के बाद का महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है, जिसने हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को आश्रय दिया है और यह चार टाइगर रिजर्व और 18 संरक्षित क्षेत्रों से सुरक्षित है।

वन्यजीव संरक्षण में भारत की भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत वन्यजीव संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व निभा रहा है। देश दुनिया की सात “बिग कैट” प्रजातियों में से पांच का आवास स्थल है और विश्व की लगभग 70 प्रतिशत बाघ आबादी यहीं पाई जाती है। पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि को उर्वर बनाने का कार्य किया गया है।

सम्मेलन और नीति चर्चा

सम्मेलन में नीति निर्माता, वन अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रैक्टिशनर और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि एक साथ आए, ताकि अरावली रेंज के पारिस्थितिक महत्व, इसके पुनर्स्थापन और संरक्षण के उपायों पर चर्चा की जा सके। उद्घाटन सत्र में हरियाणा के पर्यावरण मंत्री श्री राव नरबीर सिंह, पर्यावरण मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार, वन महानिदेशक श्री सुशील कुमार अवस्थी, डेनमार्क के राजदूत रासमस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और संकल्प फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी संबोधन दिया।

रिपोर्ट में अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक, समुदाय-आधारित और मापन योग्य ढांचा प्रदान किया गया है। इसमें जोर दिया गया है कि पुनर्स्थापन के प्रयास डेटा-आधारित, समुदाय-केंद्रित और बहुआयामी होने चाहिए, क्योंकि क्षेत्र में पारिस्थितिक दबाव और गिरावट व्यापक रूप से फैली हुई है।

भविष्य की दिशा

श्री यादव ने कहा कि सरकार पारिस्थितिकीय स्थायित्व और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। अरावली सहित देश भर में इकोसिस्टम के संरक्षण और पुनर्स्थापन को प्राथमिकता दी जा रही है।

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