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हरियाणा जेलों में कौशल विकास और पॉलिटेक्निक कोर्सेज की शुरुआत, सुधारात्मक न्याय में नई पहल

हरियाणा जेलों में कौशल विकास और पॉलिटेक्निक कोर्सेज की शुरुआत, सुधारात्मक न्याय में नई पहल

हरियाणा की जेलों में कौशल विकास केंद्र, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा और आईटीआई कोर्सेज की शुरुआत, कैदियों के लिए रोजगार योग्य, आत्मनिर्भर और सम्मानित नागरिक बनने के अवसर प्रदान करने के लिए सुधारात्मक न्याय में ऐतिहासिक पहल।

हरियाणा ने सुधारात्मक न्याय के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य की जेलों में “एम्पावरिंग लाइव्स बिहाइंड बार्स” प्रोजेक्ट के तहत कौशल विकास केंद्र, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कोर्स और आईटीआई स्तर के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जिला जेल भोंडसी, गुरुग्राम से किया। इसी अवसर पर पंजाब, हरियाणा और यू.टी. चंडीगढ़ में एक महीने के राज्यव्यापी नशा-रोधी जागरूकता अभियान का भी शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और राज्य के प्रमुख गणमान्यों ने भाग लिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जेल में शिक्षा, कौशल और मनोवैज्ञानिक समर्थन न होने पर कैदी समाज में पुनर्वास में असफल हो सकते हैं और अपराध के चक्र में लौट सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केवल आशा पर नहीं, बल्कि योजनाबद्ध प्रक्रिया पर आधारित होना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिए कि प्रत्येक जिले में पुनर्वास बोर्ड गठित किया जाए, जिसमें प्रोबेशन अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाएं और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हों। उन्होंने प्रवासी मजदूरों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए सरल ज़मानत प्रक्रिया और बहुभाषीय कानूनी सहायता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों ने कहा कि जेलों को सिर्फ दंड केंद्र नहीं, बल्कि कौशल, शिक्षा और रोजगार के माध्यम से पुनर्निर्माण और नई शुरुआत का केंद्र बनाना आवश्यक है। न्यायमूर्ति अहसनुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि समाज का कर्तव्य है कि सुधार कर चुके व्यक्तियों को सम्मानपूर्वक स्वीकार करे।

मुख्य सचिव हरियाणा, अनुराग रस्तोगी ने बताया कि इस पहल से कैदियों को कौशल, आत्मनिर्भरता और रोजगार क्षमता प्रदान की जाएगी। अब कैदियों को कोपा, वेल्डर, प्लंबर, ड्रेस मेकिंग, इलेक्ट्रिशियन, वुडवर्क तकनीशियन, सिलाई, कॉस्मेटोलॉजी और कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे आईटीआई ट्रेड और तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।

इस पहल का उद्देश्य कैदियों को सक्षम, रोजगार योग्य और सम्मानित नागरिक बनाना है। यह कार्यक्रम जेलों को सिर्फ बंदीगृह न बनाकर सीखने, विकास और पुनर्वास का केंद्र बनाने का काम करेगा। इससे न केवल अपराध पुनरावृत्ति कम होगी, बल्कि कैदियों को समाज में सकारात्मक योगदान देने का अवसर मिलेगा।

साथ ही, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राज्यव्यापी नशा-रोधी अभियान भी शुरू किया गया, जिसमें छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक, काउंसलिंग कैंप, कानूनी साक्षरता सत्र और सोशल मीडिया अभियान शामिल हैं।

कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, एसीएस (गृह, जेल एवं न्यायिक) डॉ. सुमिता मिश्रा, गृह विभाग की सचिव आमना तसनीम, महानिदेशक जेल आलोक राय, महानिरीक्षक (कारागार) बी. सतीश बालन, जीएमडीए सीईओ पी.सी. मीणा, गुरुग्राम डीसी अजय कुमार, सीपी विकास अरोड़ा, नगर निगम मानेसर आयुक्त प्रदीप सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) और अन्य न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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