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श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी: सत्य, बलिदान और मानवता की अमर विरासत – हरियाणा मुख्यमंत्री

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी: सत्य, बलिदान और मानवता की अमर विरासत – हरियाणा मुख्यमंत्री

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर “तप से त्याग तक” नाटक का शुभारंभ किया। बलिदान और मानवता की विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने पर जोर।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का जीवन हमें सिखाता है कि चाहे अत्याचार कितना भी बड़ा क्यों न हो, सत्य और धर्म की शक्ति हमेशा उससे अधिक महान होती है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा का मार्ग है। मुख्यमंत्री ने गुरु साहिब के बलिदान को मानवता का दिव्य पर्व बताया और कहा कि भारत सदियों से आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र रहा है।

श्री नायब सिंह सैनी ने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर गुरुग्राम के अपैरल हाउस में “तप से त्याग तक” संगीतमय नाटक का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का आयोजन कश्मीरी हिंदू प्रकोष्ठ हरियाणा एवं श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। प्रमुख अतिथि पद्म भूषण अभिनेता अनुपम खेर ने कार्यक्रम में भाग लिया और गुरु साहिब के बलिदान का महत्व बताते हुए इसे संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए प्रेरक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नाटक विशेष रूप से युवा पीढ़ी को यह संदेश देता है कि बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बल्कि चेतना है जो राष्ट्र को जीवंत रखती है। उन्होंने इस अवसर पर हरियाणा सरकार के 1984 के दंगों में प्रभावित सिख परिवारों को सरकारी नौकरी देने के निर्णय का भी उल्लेख किया। प्रदेश में सिख विरासत और गुरु परंपरा के संरक्षण के लिए विभिन्न पहल की गई हैं, जिनमें मेडिकल कॉलेज, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के नामकरण के माध्यम से गुरु साहिबों के सम्मान को मजबूत किया गया है।

अनुपम खेर ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी का बलिदान सिर्फ सिख इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने भारत सरकार और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया कि उन्होंने कश्मीरी हिंदुओं और सिख समुदाय के पुनर्वास और सुरक्षा में संवेदनशील कदम उठाए।

आरएमके आर्ट्स फाउंडेशन, जम्मू ने विजय धर के निर्देशन में नाटक का मंचन किया। संगीत और ध्वनि रूपांकन के लिए कुलदीप सप्रू ने योगदान दिया। कार्यक्रम में गुरुग्राम विश्वविद्यालय, विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय और विभिन्न अन्य संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी और समाज के सदस्य उपस्थित रहे।

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