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उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने काशी तमिल संगमम 4.0 को वर्चुअली संबोधित किया: सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने काशी तमिल संगमम 4.0 को वर्चुअली संबोधित किया: सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने काशी तमिल संगमम 2025 को वर्चुअली संबोधित किया, सांस्कृतिक एकता, ‘आइए तमिल सीखें’ थीम और काशी-तमिलनाडु के प्राचीन संबंधों पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने काशी तमिल संगमम 2025 के चौथे संस्करण को वर्चुअली संबोधित किया और इस पहल को उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता और साझा सभ्यतागत धरोहर का प्रतीक बताया। इस अवसर पर उन्होंने ‘आइए तमिल सीखें’ की थीम का स्वागत करते हुए, इसे भाषाई और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक

उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी तमिल संगमम भारत के एकता और विविधता की शक्ति का प्रतीक है, जो भारत के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करता है। इस पहल ने काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुरानी सांस्कृतिक संबंधों को और सशक्त किया है और यह दोनों क्षेत्रों की समृद्ध सभ्यता का मिलाजुला उत्सव है। उन्होंने इस कार्यक्रम को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण के तहत प्रस्तुत किया, जो राष्ट्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

काशी और तमिलनाडु के संबंध

उपराष्ट्रपति ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को साझा करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम की शुरुआत 2022 में आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत हुई थी, और यह अब एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री की हाल की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा, “यह संगमम, दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं और सबसे प्राचीन जीवित शहरों के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मिलन स्थल है।”

‘आइए तमिल सीखें’ का स्वागत

उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष की काशी तमिल संगमम की थीम ‘आइए तमिल सीखें’ का स्वागत किया, जो न केवल भाषाई विविधता को बढ़ावा देती है, बल्कि यह सांस्कृतिक समृद्धि और आपसी समझ को भी सशक्त बनाती है। उन्होंने केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान द्वारा हिंदी भाषी तमिल शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की पहल की सराहना की, जिनका उद्देश्य तमिल भाषा को स्कूलों के छात्रों में लोकप्रिय बनाना है।

तेनकासी से काशी तक अगथियार यात्रा

उपराष्ट्रपति ने काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन सांस्कृतिक मार्गों की खोज पर जोर देते हुए तेनकासी से काशी तक की अगथियार यात्रा का उल्लेख किया, जो 2 दिसंबर से शुरू होकर 10 दिसंबर तक चलेगी। यह यात्रा पांड्य राजा अथिवीरा पराक्रम पांडियन द्वारा फैलाए गए एकता के संदेश का प्रतीक है, जो तमिलनाडु और काशी के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करती है।

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान

उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश के छात्रों द्वारा तमिलनाडु की यात्रा का भी स्वागत किया। इस यात्रा के तहत 300 छात्रों को तमिलनाडु के प्रमुख संस्थानों का दौरा करना है, जिससे दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक समझ और आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्रीय मंत्रालयों की सराहना

उपराष्ट्रपति ने इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के भव्य आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देता है, बल्कि यह एक विशाल आध्यात्मिक और बौद्धिक उत्सव के रूप में सामने आता है।

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