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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सत्य साई बाबा के शताब्दी समारोह में भाग लिया, आध्यात्म और सेवा के संदेश को किया जोरदार रूप से रेखांकित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सत्य साई बाबा के शताब्दी समारोह में भाग लिया, आध्यात्म और सेवा के संदेश को किया जोरदार रूप से रेखांकित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पुट्टपर्थी में सत्य साई बाबा के शताब्दी समारोह में भाग लिया, सेवा और मानवीय मूल्यों पर जोर दिया।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज पुट्टपर्थी स्थित प्रशांति निलयम में आयोजित श्री सत्य साई बाबा के शताब्दी समारोह के विशेष सत्र में भाग लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने बाबा के आध्यात्म और सेवा के मार्गदर्शन को राष्ट्र और समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्राचीन काल से हमारे ऋषि-मुनि समाज को उनके कर्म और वचनों के माध्यम से मार्गदर्शन करते आए हैं। ऐसे ही महापुरुषों में श्री सत्य साई बाबा का विशेष स्थान है। उन्होंने न केवल मानवता की सेवा को ईश्वर की सेवा माना बल्कि अपने अनुयायियों को निःस्वार्थ सेवा और व्यक्तिगत परिवर्तन के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

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राष्ट्रपति ने सत्य साई बाबा के सामाजिक कल्याण कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट के माध्यम से हजारों छात्रों को उच्च-गुणवत्ता वाली निःशुल्क शिक्षा, चरित्र निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएँ, और सूखा प्रभावित गाँवों में पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह बाबा का दूरदर्शी दृष्टिकोण और लोक कल्याण की प्रतिबद्धता दर्शाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बाबा के मानवीय मूल्यों और संदेश—“सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो” और “सदैव सहायता करो, कभी किसी को दुःख न पहुँचाओ”—को शाश्वत और सार्वभौमिक करार दिया। उनका कहना था कि सत्य, नैतिकता, शांति, प्रेम और अहिंसा के सिद्धांत सभी संस्कृतियों और समय के लिए प्रासंगिक हैं।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक संगठन महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सभी धर्मार्थ संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र और नागरिकों से अपील की कि वे भारत सरकार के प्रयासों में सहयोग करें ताकि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सके।

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