राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और बौद्धिक विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय ने न केवल उच्च शैक्षणिक मानकों को बनाए रखा है, बल्कि समाज के व्यापक वर्गों तक शिक्षा का लाभ भी पहुँचाया है।”
राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत विकास नहीं बल्कि समाज के समग्र विकास से जुड़ा हुआ होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को यह सलाह दी कि वे शिक्षा को समाज के हित में प्रयोग करें और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करें।
आजीवन सीखने के महत्व पर जोर
राष्ट्रपति ने छात्रों को जीवनभर सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने महात्मा गांधी के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने जीवनभर अध्ययन किया और विभिन्न कौशल सीखे। उन्होंने छात्रों से आश्चर्य की भावना और जिज्ञासा बनाए रखने का आग्रह किया, ताकि वे निरंतर अपने कौशल में वृद्धि कर सकें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नए रोजगार के अवसर
राष्ट्रपति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक क्रांति 4.0 के प्रभाव की बात की और बताया कि इन नवाचारों से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग नए कौशल सीखने में सक्षम होंगे, वे ही परिवर्तन के अग्रणी बनेंगे।”
चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का महत्व
राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के मिशन ‘मजबूत चरित्र का निर्माण और मूल्य आधारित कार्य नैतिकता का पोषण’ को सराहा और विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के छात्र इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएंगे। उन्होंने कहा, “आज की आवश्यकता यह है कि हमारे पास संवेदनशीलता हो, ताकि हम समाज की बेहतर सेवा कर सकें।”
समाज के प्रति जिम्मेदारी और शिक्षा का उद्देश्य
राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय से आग्रह किया कि वह शिक्षा को समाज के कल्याण के लिए प्रयोग करें और छात्रों को यह समझाने की कोशिश करें कि उनका विकास समाज के विकास से जुड़ा हुआ है।