भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मुलाकात, कूटनीतिक प्रयासों पर दिया मार्गदर्शन
भारतीय विदेश सेवा (2024 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने अधिकारियों को भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने पर बधाई दी और उनके कर्तव्यों के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
कूटनीतिक प्रयासों का उद्देश्य और भारत की भूमिका
राष्ट्रपति मुर्मु ने अधिकारियों से कहा कि उनके कूटनीतिक प्रयासों को भारत के घरेलू उद्देश्यों और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य से जोड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि दुनिया में हो रहे भू-राजनीतिक बदलावों, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल क्रांति और बहुपक्षवाद के प्रभाव को समझते हुए, भारतीय कूटनीतिज्ञों को अपनी चपलता और अनुकूलनशीलता का इस्तेमाल करना होगा।
भारत के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ही नहीं है, बल्कि यह एक तेजी से उभरती हुई आर्थिक शक्ति भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी भारत के पहले प्रतिनिधि होंगे, जिनसे दुनिया भारत के विचारों, मूल्यों और कार्यों को जानेगी।
सांस्कृतिक कूटनीति का महत्व
राष्ट्रपति मुर्मु ने आज के समय में सांस्कृतिक कूटनीति के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हृदय और आत्मा से बने संबंध हमेशा मजबूत होते हैं। चाहे वह योग हो, आयुर्वेद हो, श्रीअन्न हो या भारत की कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराएं हों, भारत की इस महान सांस्कृतिक धरोहर को विदेशों में अधिक रचनात्मक तरीके से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
भारत की आत्मा का राजदूत बनने का आह्वान
राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से कहा कि उन्हें केवल भारत के राष्ट्रीय हितों के संरक्षक के रूप में काम नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें भारत की आत्मा का राजदूत भी मानना चाहिए। यह कूटनीतिक दृष्टिकोण भारत के वैश्विक उद्देश्य और 2047 तक एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।