हरियाणा सरकार ने जीपीएफ अग्रिम और निकासी पर जारी किए नए निर्देश, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सख्त नियम
हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों और खजाना अधिकारियों को जीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि) अग्रिम (एडवांस) और निकासी के मामलों में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत, कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से पूर्व अंतिम छह महीनों के दौरान जीपीएफ अग्रिम की स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, जो वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का कार्यभार संभाल रहे हैं, ने इस संबंध में एक पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया कि सेवानिवृत्ति से पूर्व 12 महीनों में स्वीकृत किसी भी जीपीएफ अग्रिम या निकासी की जानकारी प्रपत्रों में स्पष्ट रूप से दर्ज की जानी चाहिए। इसे प्रशासनिक विभाग द्वारा प्रमाणित भी किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह कदम?
वित्त विभाग ने पाया कि कुछ प्रशासनिक विभाग और डीडीओ (ड्रॉइंग और डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स) जीपीएफ अंतिम भुगतान को भेजने के बाद भी वसूली योग्य या गैर-वसूली योग्य अग्रिम स्वीकृत कर रहे हैं, जिससे वित्तीय गड़बड़ी हो रही है। इसके अलावा, जीपीएफ अंतिम भुगतान से जुड़ी जरूरी जानकारी जैसे कि अग्रिम या निकासी के विवरण को सही से नहीं भरा जा रहा था, जिससे गलत भुगतान और वित्तीय नुकसान की संभावना बढ़ रही थी।
महत्वपूर्ण निर्देश:
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सेवानिवृत्ति से पहले के 12 महीने में अग्रिम जानकारी अनिवार्य: सेवानिवृत्ति से पूर्व 12 महीनों के दौरान स्वीकृत अग्रिम या निकासी का विवरण प्रपत्रों में सही तरीके से भरना और प्रमाणित करना जरूरी होगा।
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ऑनलाइन प्रक्रियाओं का पालन: जीपीएफ अंतिम भुगतान के मामलों का ऑनलाइन सबमिशन केवल “ऑनलाइन डायरी मैनेजमेंट सिस्टम (ODMS)” के माध्यम से होगा। वहीं, अग्रिम और आहरण से संबंधित कार्य “ई-बिलिंग पोर्टल (T&A)/NIC” पर किए जाएंगे।
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अग्रिम स्वीकृति की सूचना: यदि किसी अपवाद की स्थिति में अग्रिम स्वीकृत किया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत आधिकारिक ईमेल या अन्य माध्यम से दी जानी चाहिए।