केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत विकास परिषद के 63वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य भाषण दिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत विकास परिषद के 63वें स्थापना दिवस समारोह में सेवा, संगठन और संस्कार के महत्व पर जोर दिया। मोदी सरकार की उपलब्धियां, मातृभाषा शिक्षा नीति और डिजिटल भुगतान विस्तार पर भी चर्चा की गई।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में भारत विकास परिषद के 63वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अमित शाह ने कहा कि भारत विकास परिषद 63 वर्षों से निरंतर सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि यह संगठन ‘समर्पण’, ‘संगठन’ और ‘संस्कार’ के मूल्य को अपनाकर समाज में सज्जन शक्ति का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि परिषद सेवा करने वालों और जरूरतमंदों के बीच सेतु का काम कर रही है और देश के 412 जिलों में इसकी 1600 से अधिक शाखाएं सक्रिय हैं।
श्री शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्षों के शासनकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान 55 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुले, 15 करोड़ घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया, 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए और लाखों महिलाओं को मुद्रा योजना के तहत ऋण दिए गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने डिजिटल भुगतान को रेहड़ी वालों तक पहुंचाकर विकास और विरासत दोनों को संगठित किया है।
गृह मंत्री ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करते हुए कहा कि भारत विकास परिषद सेवा को संगठन, संगठन को संस्कार और संस्कार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ रही है। उन्होंने मणिपुर के स्वतंत्रता सेनानी हेमम नीलमणि सिंह को मरणोपरांत सम्मानित किया, जिन्होंने भाषाई एकता के लिए जीवन समर्पित किया।
अमित शाह ने मोदी सरकार की शिक्षा नीति, जिसमें मातृभाषा में पढ़ाई को बढ़ावा दिया गया है, और AI तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में की गई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए पांच प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें एकता, विरासत पर गर्व, और नागरिक कर्तव्य भावना शामिल है।
श्री शाह ने कहा कि भारत विकास परिषद एक विचार है जो हर भारतीय को भारतीयता से जोड़ता है और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि विरासत को बनाए रखते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ना ही आज का सबसे बड़ा संकल्प है।